पुरस्कार और सम्मान

      डॉक्टर योगेश चावला, निदेशक पी.जी.आई.एम.ई.आर. ने हाल ही में 28 जुलाई 2011 को कलिंगा उदरवहनीय विभाग द्वारा “हेप्पेटाइटिस के उन्मूलन” विषय पर ब्ल्मबेर्ग ओरेशन प्राप्त किया। उन्हे हेप्पेटोलोजी के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए 1999 में भारत की चिकित्सा परिषद की सिल्वर जुबली पर डॉक्टर बी. सी. रॉय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।  उनके आई. सी. एम. आर. में 1997 में उनके कार्य “पोर्टल हीमोडायनामिक्स के लिए एम. आर. सेन. पुरस्कार एवं 1999 में पोर्टल उच्चरक्तचाप में अस्थायी वेरीकाज़” के लिए ऐंम्रट मोदी यूनिकेम पुरस्कार शामिल हैं। भारतीय उदरवाहनीय संस्था ने उन्हे 2002-2003 में कोचीन में “भारत  में  उच्चरक्तचाप पोर्टल में गैर सूत्रकरोग” अनुसंधान के लिए पार्क डेविस ओरंशन पुरस्कार एवं 1999-2000 में जी. आई. एंडोस्कोपी (अत: विस्तार) में ज्ञान एवं विशेषज्ञता के प्रसार के लिए Olympus जे मित्रा पुरस्कार और 1999–2001 में उदरवाहनीय एवं हेप्पेटोलोजी (यकृतविज्ञान) के क्षेत्र में विभाग को बेहतरीन वास्तविक योगदान के लिए फाईज़र अमीर चंद ट्राफी से सम्मानित किया।

      वे ऑस्ट्रेलिया उदरवाहिनी एवं यकृतविज्ञान के दैनिकी पत्रिका की संपादन समिति में, अंतरराष्ट्रीय यकृत विज्ञान (जापान) अंतरराष्ट्रीय यकृत (डेनमार्क) पाचक विकार एवं विज्ञान (अमेरिका) और मैदानिक एवं प्रयोगात्मक यकृत के दैनिकी की संपादक समिति में शामिल है। चिकित्सा विज्ञान के राष्ट्रीय परिषद एनल्स के सलाहकार समिति के सदस्य भी हैं। 

 

वे चिकित्सा विज्ञान की राष्ट्रीय परिषद एवं उदरवाहनीय के अमेरिका विद्यालय के अधिसदस्य/पार्षद भी हैं। वे यकृत विकार अध्ययन के लिए अमेरिकन संस्था, (ए.ए.एस.एल.डी.), यकृत  अध्ययन के यूरोपीयन संस्थान (ई.ए.एस.एल.), यकृत अध्ययन की अंतरराष्ट्रीय संस्थान (आई.ए.एस.एल.), यकृत अध्ययन की एशियाई पैसिफिक संस्था (ए.पी.ए.एस.एल.) के सदस्य हैं। वे यकृत अध्ययन की भारतीय संस्था (आई.एन.ए.एस.एल.), भारतीय उदरवाहनीय समिति (आई.एस.जी.), भारतीय उदरआंत्र अन्त:विस्तार समिति एवं भारतीय अंग प्रतिरोपण समिति के आजीवन सदस्य हैं।